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Thursday, September 17, 2020

Sri Narasimha Stambha Avirbhava Stotram – श्री नृसिंह स्तम्भाविर्भाव स्तोत्रम्

 


Sri Narasimha Stambha Avirbhava Stotram – श्री नृसिंह स्तम्भाविर्भाव स्तोत्रम्






सहस्र भास्कर स्फुरत्प्रभाक्ष दुर्निरीक्षणं
प्रभग्नकॄर कृद्धिरण्य कश्यपोरु रस्थलम् ।
अजस्तृ जाण्डकर्प रप्रभग्न रौद्रगर्जनं
उदग्र निग्रहाग्र होग्र विग्रहाकृतिं भजे ॥ १ ॥

स्वयम्भु शम्भु जम्भजित्प्रमुख्य दिव्यसम्भ्रमं
द्विजृम्भ मध्य दुत्कटोग्र दैत्यकुम्भ कुम्भिनिन् ।
अनर्गलाट्‍टहास निस्पृहाष्ट दिग्गजार्भटिन्
युगान्ति मान्तमत्कृतान्त धिक्कृतान्तकं भजे ॥ २ ॥

जगज्वलद्द हद्ग्रसत्प्रहस्फुरन्मुखार्भटिं
महद्भ यद्भ वद्द हग्र सल्ल सत्कृताकृतिम् ।
हिरण्यकश्यपो सहस्र संहरत्समर्थ कृन्मु हुर्मु हुर्मु हुर्ग लध्वनन्नृसिंह रक्ष माम् ॥ ३ ॥

दरिद्रदेवि दुष्टि दृष्टि दुःख दुर्भरं हरं
नवग्रहोग्र वक्र दोषणादि व्याधि निग्रहम् ।
परौषधादि मन्त्र यन्त्र तन्त्र कृत्रि मंहनं
अकाल मृत्यु मृत्यु मृत्यु मुग्र मूर्तिणं भजे ॥ ४ ॥

जयत्व वक्र विक्रम क्रम क्रम क्रियाहरं
स्फुरत्सहस्र विस्फुलिङ्ग भास्कर प्रभाग्रसत् ।
धगद्धगद्ध गल्लसन्महद् भ्रमत्सुदर्शनो-
न्मदेभ भित्स्वरूप भृद्भब वत्कृपार सामृतम् ॥ ५ ॥

विपक्ष पक्ष राक्षसाक्ष माक्ष रूक्ष वीक्षणं
सदाऽक्षयत्कृपा कटाक्ष लक्ष्म लक्ष्मि वक्षसम् ।
विचक्षणं विलक्षणं प्रतीक्षणं परीक्षणं
परीक्ष दीक्ष रक्ष शिक्ष साक्षिणं क्षमं भजे ॥ ६ ॥

अपूर्व शौर्य धैर्य वीर्य दुर्निवार्य दुर्गमं
अकार्यकृद्धनार्य गर्वपर्वतप्रहार्यसत् ।
प्रचार्य सर्वनिर्व हस्तु पर्यवर्य पर्विणं
सदार्य कार्य भार्य भृद्दु दार वर्यणं भजे ॥ ७ ॥

प्रपत्ति नार्द्र नाभ नाभि वन्दन प्रदक्षिणा
नतान नाङ्गवाङ्मनःस्मरज्ज पस्तुवद्गदा ।
अश्रुपूरणार्द्रपूर्ण भक्ति पारवश्यता
सकृत्क्रिया चरद्ध वत्कृपा नृसिंह रक्ष माम् ॥ ८ ॥

कराल वक्त्र कर्क शोग्र वज्र दम्ष्ट्र मुज्ज्वलं
कुठार खड्ग कुन्त रोम राङ् कुशो न्नखायुधम् ।
मह द्भ्रयूध भग्न सञ्चलज्ञता सटालकं
जगत्प्रमूर्छिताट्‍टहास चक्रवर्तिणं भजे ॥ ९ ॥

नवग्रहाऽप मृत्यु गण्ड वास्तुरोग वृश्चिका-
-ऽग्नि बाडबाग्नि काननाग्नि शतृमण्डल ।
प्रवाह क्षुत्पिपास दुःख तस्कर प्रयोग दुष्प्रमाद सङ्कटात्सदा नृसिंह रक्ष मां प्रभो ॥ १० ॥

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् ।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्योर्मृत्युर्नमाम्यहम् ॥


ॐ नमो नृसिंह देवाय ॥